Saturday, September 20, 2014

नजरों से यूं,शरारतें भी,करने दे अभी जाना।
प्यार से कुछ,निहारते ही,रहने दे अभी जाना।

तेरे रूप,के दरिया में,नजरों से सफर कर लूं,,
यूं तस्वीर,तेरी दिल में,उतरने दे अभी जाना।

तेरे चेहरे की,रंगीं धूप है,लटों में घर कर लूं,,
इन जुल्फों को,कुछ यूंहीं,बिखरने दे अभी जाना।

मैं तीर कहूं,या शमशीर,जाना तेरी निगाहों को,,
हुक्म-अंदाज़,नजरों को,बहकने दे अभी जाना।

मैं महकता रहूँ,तेरी इन,लरजती सांसों में,,
आह में आह,जरा हमको,भरने दे अभी जाना।

शौकीन'की जान,बेईमान,कातिल भी तुम्हीं हो,,
दिल मजरूह,मेरा है,उबरने दे अभी जाना।

हुक्म-अँदाज=अचूक निशाने वाला/वाली

सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
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