मन तरंग क्या खबर कब उठ जाए।
ख्वाहिशों के नकाब कब हट जाए।
मुझे दम तोडने दे ए मन भीतर तेरे,,
मुझे हवा देके कहीं तू ही भटक जाए।
मुझे निवस्त्र ना कर सरे महफिल तू,,
तेरे दिल की दिख ना तलछट जाए।
मुझे रख मजे ले पर स्वीकार ना कर,,
मेरी नग्नता तेरे गले ना अटक जाए।
मुझे पलने दे"शौकीन"आईने बकते हैं,,
मुझको देखने कौन भीतर तक जाए।
30/09/2014
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
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मुझे दम तोडने दे ए मन भीतर तेरे,,
मुझे हवा देके कहीं तू ही भटक जाए।
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तेरे दिल की दिख ना तलछट जाए।
मुझे रख मजे ले पर स्वीकार ना कर,,
मेरी नग्नता तेरे गले ना अटक जाए।
मुझे पलने दे"शौकीन"आईने बकते हैं,,
मुझको देखने कौन भीतर तक जाए।
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