Sunday, May 27, 2018


वो घर में आइना रखता नहीं है
उसे  मालूम  है  वो क्या नहीं है
ख़ुदा हो जाने तक अपने सफ़र में
मुसाफ़िर आदमी रहता नहीं है
وہ گھر میں آئنہ رکھتا نہیں ہے
اُسے معلوم  ہے  وہ کیا نہیں ہے
خودا ہو جانے تک اپنے سفر میں
مسافر   آدمی    رہتا   نہیں ہے
© سُجیت شوقین
सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐27/05/2018
©कवि सुजीत शौक़ीन 09811783749

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