रब की सौग़ात को गज़ल कह दूँ
मैं तेरी ज़ात को गज़ल कह दूँ
तू गज़ल है तो क्या जरूरी है
तेरी हर बात को गज़ल कह दूँ
رب کی سوغات کو غزل کہ دُوں
میں تیری زات کو غزل کہ دُوں
تو غزل ہے تہ کیا ضروری ہے
تیری ہر بات کو غزل کہ دُوں
© سُجیت شوقین
सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐06/01/2018
©कवि सुजीत शौक़ीन 09811783749
मैं तेरी ज़ात को गज़ल कह दूँ
तू गज़ल है तो क्या जरूरी है
तेरी हर बात को गज़ल कह दूँ
رب کی سوغات کو غزل کہ دُوں
میں تیری زات کو غزل کہ دُوں
تو غزل ہے تہ کیا ضروری ہے
تیری ہر بات کو غزل کہ دُوں
© سُجیت شوقین
सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐06/01/2018
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