हमने रोका न रुक वो सकी
खुद ब खुद साँस चलती रही
साँस लेने से हासिल ये था
ऐसा लगता था है ज़िन्दगी
गौर से ही न देखा कभी
साथ रहते रहे अजनबी
चाँद सूरज के संग में रहा
फिर भी पा ना सका रोशनी
दिल के शौक़ीन ये जख्म हैं
लोग कहते जिसे शायरी
(28/05/2015)सर्वाधिकार सुरक्षित
रचनाकार @ कवि सुजीत शौकीन
09811783749
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साँस लेने से हासिल ये था
ऐसा लगता था है ज़िन्दगी
गौर से ही न देखा कभी
साथ रहते रहे अजनबी
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फिर भी पा ना सका रोशनी
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