हरबार दर्द का,आगाज ढूँढते हैं,,
हमजो आशिकी का,ताज ढूँढते हैं।
शायद जिन्दा हो मौहब्बत अभी,,
हम कब्र में,मुमताज ढूँढते हैं।
मरने को उम्र काफी थी अभी,,
रोग मगर,लाईलाज ढूँढते हैं।
करके प्रीत यहाँ,हो पाया शुकून,,
हम ऐसा कोई,जांबाज ढूँढते हैं।
सरकते पल्लू हमको भी भाते हैं,,
पर जिस्म नहीं,जज्बात ढूँढते हैं।
पत्थर मारे गए,दिवानों को सदा,,
वो पत्थरों में,पुखराज ढूंढते हैं।
पत्थरों से दिल,लगा के बुतकार,,
बुत में वो कैसी,आवाज ढूँढते हैं।
पंख नही पर,हौंसलें जो बुलंद हैं,,
तुफानों में भी,परवाज ढूँढते हैं।
शौकीन तो कहता है दिल की लगी,
लोग पर दर्द में भी,राज ढूँढते हैं।
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुजीत शौकीन
ब्लाग: http://sujeetshokeen.blogspot.in
फेसबुक: https://www.facebook.com/sujeet.shokeen
मेरा पेज: https://www.facebook.com/pages/Kavi-Sujeet-Shokeen/253451778196049
हमजो आशिकी का,ताज ढूँढते हैं।
शायद जिन्दा हो मौहब्बत अभी,,
हम कब्र में,मुमताज ढूँढते हैं।
मरने को उम्र काफी थी अभी,,
रोग मगर,लाईलाज ढूँढते हैं।
करके प्रीत यहाँ,हो पाया शुकून,,
हम ऐसा कोई,जांबाज ढूँढते हैं।
सरकते पल्लू हमको भी भाते हैं,,
पर जिस्म नहीं,जज्बात ढूँढते हैं।
पत्थर मारे गए,दिवानों को सदा,,
वो पत्थरों में,पुखराज ढूंढते हैं।
पत्थरों से दिल,लगा के बुतकार,,
बुत में वो कैसी,आवाज ढूँढते हैं।
पंख नही पर,हौंसलें जो बुलंद हैं,,
तुफानों में भी,परवाज ढूँढते हैं।
शौकीन तो कहता है दिल की लगी,
लोग पर दर्द में भी,राज ढूँढते हैं।
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