Saturday, July 20, 2019

लोग हम से दुनिया में सर्द बिल-इरादा हैं
शक्ल से ख़फ़ा हैं कम,नाम से ज़ियादा हैं
बा-लिबास दिखते हैं बे-लिबास होकर भी
ज़ेहन के ये कारिंदे सूरतों से सादा हैं
لوگ ہم سے دنیا میں سرد بل ارادہ ہیں
 شکل سے خفا ہیں کم نام سے زیادہ ہیں
 با لباس دکھتے ہیں بے لباس ہو کر بھی
 زہن کے یہ کارندے صورتوں سے سادہ ہیں
 © سُجیت شوقین
 सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐 20/07/2019
रचनाकार © कवि सुजीत शौक़ीन 

Sunday, April 28, 2019

ख़िजाँ की शाख़ पे कोई समर नहीं आता
उजाला ज़ात के अंधों के घर नहीं आता
मुसाफ़िरों से कहो सुब्ह तक क़याम करें
अँधेरी रात में रस्ता नज़र नहीं आता
©सुजीत शौक़ीन
 خزاں کی شاخ پہ کوئی ثمر نہیں آتا
 اُجالا زات کے اندھوں کے گھر نہیں آیا
 مسافروں سے کہو صبح تک قیام کریں
 اندھیری رات میں رستہ نظر نہیں آتا
©سُجیت شوقین
सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐 28/04/2019
रचनाकार © कवि सुजीत शौक़ीन 

Thursday, April 25, 2019

वो जानते ही कितना हैं मुझको ए दोस्तो
जो जानते हैं मुझ को मुलाक़ात के बग़ैर
कुछ लोग मेरे साएबाँ में ऐसे हैं जिन्हें
साया तो मेरा चाहिए लेकिन मेरे बग़ैर
وہ جانتے ہی کتنا ہیں مجھکو اے دوستو
 جو جانتے ہیں مجھکو ملاقات کے بغیر
کچھ لوگ میرے سائباں میں ایسے ہیں جنہیں
سایہ تو میرا چاہیے لیکن میرے بغیر ©سُجیت شوقین
सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐25/04/2019
रचनाकार © कवि सुजीत शौक़ीन 

Wednesday, March 20, 2019

तफ़्सील मेरे क़त्ल की मत पूछिए मुझ से
मुझपे जो चली रहम से आरी थी वो आरी
 تفصیل مرے قتل کی مت پوچھئے مجھ سے
 مجھ پر جو چلی رحم سے عاری تھی وہ آری
आरी-عاری-free from-रहित,
आरी-آری-a saw- आरी
सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐©सुजीत शौक़ीन 

Sunday, February 10, 2019

उस की ज़ुबान बोलूँ वगरना रहूँ ख़मोश
वो चाहता है उसकी इताअत करूँ ख़मोश
मुझ से अना ये बोलती है बोलता रहूँ
पर वक़्त की रज़ा है अना को कहूँ ख़मोश
©सुजीत शौक़ीन
اُس کی زبان بولوں وگرنہ رہوں خموشی
وہ چاہتا ہے اُس کی اطاعت کروں خموشی
 مجھ سے انا یہ بولتی ہے بولتا رہوں
پر وقت کی رضا ہے انا کو کہوں خموشی
 ©سُجیت شوقین
इताअत =आज्ञापालन
सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐10/02/2019
रचनाकार ©    कवि सुजीत शौक़ीन