Sunday, October 29, 2017

हम-कनार हो कर भी  बे-कनार रहता है
दिल की तो ये आदत है  बेक़रार रहता है

रेज़ा-रेज़ा बिखरी है तेरे चार-सू शौक़ीन
जिस ख़ुशी की ख़्वाहिश में सोगवार रहता है
© सुजीत शौक़ीन
ہم  کنار  ہو کر   بھی  بے کنار  رہتا ہے
دل  کی  تو  یہ عادت  ہے  بےقرار رہتا ہے

ریزہ ریزہ بکھری ہےتیرے چارسو شوقین
جس خوشی کی خواہش میں سوگوار رہتا ہے
© سُجیت شوقین

सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐29/10/2017
 रचनाकार ©    कवि सुजीत शौक़ीन