पगले अड़े हैं जो भी सयानों के सामने
दो पल भी टिक न पाएँगे जुमलों के सामने
मुर्गों से कौन लेता है अब सुबह की ख़बर
जाहिल हैं बाँग दे रहे तोपों के सामने
करने लगीं हैं मेंढकी अब शेर का शिकार
तुकबंदियाँ फुदक रहीं ग़ज़लों के सामने
सर्वाधिकार सुरक्षित 🔐22/11/2016
रचनाकार @ कवि सुजीत शौकीन
For more like my page:----
https://www.facebook.com/pages/Kavi-Sujeet-Shokeen/253451778196049
ब्लाग: http://sujeetshokeen.blogspot.in
ब्लाग २: http://gazal-e-shokeen.blogspot.in
फेसबुक: https://www.facebook.com/sujeet.shokeen

